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पेट भरने के लिए मुर्दा बन रहे गरीब, आ गया बहार

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 बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक है। लोग कहीं कोरोना से , कहीं बाढ़ से तो कहीं बेरोजगारी से मर रहे हैं। चारों तरफ कोलाहल है जो सरकार की असफलता, अअकर्मण्यता और नपुंसकता का परिचायक है। इसके बेवजूद बेशर्मी की हद पार करते हुए सरकार खुद का गुणगान कर रही है। लेकिन, पिछले चुनाव का नीतीश सरकार का स्लोगन अब भी खूब जोर से प्रचार किया जा रहा है- बिहार में बहार है, नीतीशे सरकार है।  आरा का एक वाकया सामने आने के बाद लोगों की जुबां पर यही सवाल है ; क्या यही बिहार में बहार है? दरअसल, आरा में एक रिक्शा चालक कई दिनों से भूखा था। लॉकडाउन के कारण सवारी नहीं मिल रही थी तो पेट भरने के लिए वह कफन ओढ़कर सड़क किनारे सो गया। इसके बाद राहगीरों ने कुछ पैसे डालना शुरू कर दिए। कई ने फूल और अगरबत्ती तक लाकर वहां रख दिए। कई दिनों से रिक्शा चालक यह तरकीब अपनाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। बता दें यह रिक्शा चालक पटना के बिहटा के रहने वाले हैं। इनका नाम रामदेव है और आरा में रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं। मामला उजागर होने के बाद रामदेव ने बताया कि मार्च में केंद्र सरकार द्वारा लागू लॉकडाउन में उन्हें परेश...

लद्दाख में चीन से लड़ने वाले सैनिकों के पास हथियार थे ?

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वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, नेता और रक्षा मामलों से जुड़े पत्रकार लगातार कह रहे हैं की गलवान में शहीद हुए सैनिकों के पास  हथियार नहीं थे। राहुल गाँधी ने भी ट्विटर के माध्यम से  सरकार से यह प्रश्न पूछा था की हमारे सैनिक बिना हथियार के क्यों थे। राहुल गाँधी के सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक के पास हथियार थे लेकिन 1993 और 2005 में हुए समझौते के कारण हमारे सैनिकों ने हथियार नहीं उठाए। साल 1993 और 2005 का नाम लेकर सरकार ने इसकी जिम्मेवार कांग्रेस अर्थात राहुल गांधी को ही बता दिया जो कि सरकार लगातार करती आई है। चाहे मोदी सरकार -1 हो या मोदी 2.0 हर नकारात्मक घटनाओं का जिम्मेवार मोदी और उनकी पार्टी नेहरू, इंदिरा और राजीव को हीं बताती आ रही है। पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि कितने भी समझौते क्यों न हो, अगर दूसरा पक्ष हम पर इस तरह के हमले करेगा तो हमारे सैनिक किसी भी स्थिति में गोली चलाने से नहीं चूकेंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी सरकार के बयान पर सवाल उठाया है। सवाल उठाना लाजिमी भी है। ऐसा होना नामुमकिन है कि कर्नल रैंक का कमांडिंग...

क्या भारत ने नाथू-ला से कुछ नहीं सीखा? क्या है नाथू-ला का पाकिस्तान कनेक्शन?

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ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि लद्दाख में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को बिना हथियार के रहने को कहा गया था। चीन जो की बीते कुछ सप्ताह से आक्रामक रुख अपनाए हुए है और बार-बार हो रहे स्टैन्डॉफ के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं है, उसके सामने निहत्थे सैनिकों को भेजना क्या उचित था, जब हम जानते हैं कि चीन गद्दारी और पीठ में छूरा भोकने के लिए जाना जाता है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब चीन ने धक्का-मुक्की के बाद अचानक हम पर हमला किया है।  लेकिन हम अपनी पिछली गलतियों से ज्यादा कुछ नहीं सीख रहे। हम बात कर रहे हैं 1967 में हुए भारत-चीन संघर्ष की, जिसे दूसरा भारत-चीन युद्ध भी कहा जाता है और जिसमें भारत को विजय प्राप्त हुई थी। जिस तरह से आज सीमावर्ती कई इलाकों से भारत-चीन सैनिकों के बीच हाथापाई की खबरें आ रही हैं तब भी कुछ ऐसा ही हाल था। इस तरह की संघर्ष  नाथू-ला में भी 1963 के बाद बढ़ गयी थी। नाथू-ला के उत्तरी सिरे पर चीन का जबकि दक्षिणी हिस्से पर भारत का कब्ज़ा था।  भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान अयूब ...

जिसे पाने के लिए लोग लाखों खर्च करते हैं लालू प्रसाद यादव ने उसे क्यों जाने दिया?

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भारतीय मीडिया और राजनैतिक विरोधी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  को तथाकथित चारा घोटाला को लेकर लगातार बदनाम करते रहते हैं। इस तरह ये लोग संगठित तरीके से लालू प्रशंषकों के बीच उनकी छवि धूमिल करने की फ़िराक़ में लगे रहते हैं। राजनैतिक विरोधी तो ऐसा करेंगे ही, लेकिन मीडिया इस तरीके से लालू प्रसाद यादव के पीछे क्यों पड़ी रहती है जब चारा घोटाला के मास्टरमाइंड स्वर्गीय जग्गन्नाथ मिश्रा थे और लालू ने चारा घोटाला के जांच के आदेश दिए थे। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए हमें भारतीय मीडिया के ढाँचे को समझना होगा। भारतीय मीडिया में 75 % से अधिक हैं ब्राह्मण हैं।  सवर्णों की बात करे तो वे भारतीय मीडिया में 95 % से अधिक पाए जाते हैं। लालू प्रसाद यादव ने मीडिया में कुंडली मारकर बैठे इन्हीं  लोगों के कौम के सामंती रवैये पर प्रहार कर दलित-पिछड़े को उनका अधिकार दिलाया। इसलिए लालू प्रसाद यादव को देखकर या उनका नाम सुनते ही इनके शरीर में कम्पन  शुरू हो जाती है और जुबान लडख़ड़ाने लगती है, जिसके परिणाम स्वरुप वे लोग कुछ भी बकने लगते हैं।    ...

अहीर रेजिमेंट हक है हमारा ट्रेंड कराने के पीछे क्या है बीजेपी का मकसद

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बीते 6 जून को अहीर रेजिमेंट हक़ है हमारा   ट्विटर पर ट्रेंड कराया गया। यह चार लाख से अधिक बार रीट्वीट किया गया। समझने वाली बात है की अकेले यादवों के पास इतने संसाधन नहीं हैं की वो अपने समाज से जुड़े मुद्दे को चार लाख से अधिक बार रीट्वीट करा लें। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी अखिलेश यादव ने अहीर रेजिमेंट की मांग उठाई थी। इसे ट्वीटर पर ट्रेंड करने की कोशिश भी हुई थी, लेकिन इतने रीट्वीट नहीं हो पाए थे। रीट्विटों की संख्या इससे काफी कम थी। अब प्रश्न उठता है कि इस बार इतना रीट्विट कैसे संभव हो पाया? किन लोगों की मेहनत इसके पीछे थी? किन लोगों ने इसे मुमकिन बनाया? भाजपा आईटी सेल ने मुमकिन बनाया  जवाब है भाजपा आईटी सेल के सदस्य। जवाब जानकर आप चौंके होंगे लेकिन यही सच्चाई है। ध्यान देने वाली बात है कि अहीर रेजिमेंट हक है हमारा    को 7 जून को संपन्न हुए गृहमंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली से ठीक एक दिन पहले ट्रेंड कराई गयी। रैली कुछ महीने में होने वाली बिहार चुनाव के मद्देनजर आयोजित की गई थी। बिहार में मुख्य विपक्ष राजद है, जिसके सुप्रीमो लालू यादव हैं। भा...

नितीश को किस से है फेसबुक हैक किये जाने का डर

जेडीयू ने बीते दिनों अपने कार्यकर्ताओं  से फेसबुक के हैकिंग को लेकर सावधान रहने की बात कही थी। गुप्त सूत्रों ने बताया की इसके बाद ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने अपने अकाउंट को डीएक्टिवेट कर लिया।  कई दो दिनों तक फेसबुक से नदारद रहे।  जदयू की तरफ से यह चेतवानी अमित शाह की वर्चुअल रैली से पहले दी गयी थी। अमित शाह की रैली के पीछे मकसद बिहार में अपनी शक्ति दिखानी थी।  जदयू को शंका थी की बीजेपी की आईटी सेल कहीं उसके कार्यकर्ताओं की फेसबुक प्रोफाइल से छेडछाड़ न कर दे इसके लिए कार्यकर्ताओं को हिदायत दी गयी।  गौरतलब है की बिहार चुनाव  देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह   ने 7 जून को डिजिटल रैली की थी जिसमे ७२००० एंड्राइड टीवी का प्रयोग हुआ था.

युद्ध के लिए तीन दिन में अपनी सेना तैयार कर लेने की बात करने वाले भागवत मौका आने पर चुप क्यों हो जाते?

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अजय शुक्ला समेत कई वरिष्ठ रक्षा पत्रकार के अनुसार चीनी सेना गलवान घाटी और पेंगोंग त्सो के साथ कई भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ कर चुकी है और पीछे हटने को तैयार नहीं है. कई जगह पर उसने बंकर भी बना लिए हैं। वह पुरे गलवान वैली को अपना बता रही है और पेंगोंग त्सो के बड़े हिस्से पर अपना खूंटा गाड़ दी है। भारतीय और चीनी अधिकारिओं के बीच फ्लैग मीटिंग हुई जो बेनतीजा निकली। चीन पीछे हटने के मूड में बिलकुल नहीं है। ऐसा वरिष्ठ स्वतंत्र रक्षा पत्रकार बताते हैं।  दूसरी तरफ केंद्र सरकार फ्लैग मीटिंग को सफल बता रही है और अपने मीडिया से झूठ फैला रही है कि चीन पीछे हटने को तैयार हो गया है. भारत-चीन पर सीमा पर स्तिथि कितनी भयावह है इसके अंदाजा बीते सप्ताह वायरल हुई कई वीडियो से पता चलता है। जिन क्षेत्रों में भारतीय पेट्रोलिंग की संख्या कम थी और चीनी सैनिक उस क्षेत्र में उनसे कई गुना ज्यादा थे उन क्षेत्रों में उन्हें बाँधा तक गया। 70-80 सैनिकों को काफी चोटें आयी जिसके बाद उन्हें स्थिति की गौभीरता के अनुसार चंडीगढ़ तक इलाज के लिए भेजा गया। बीते कुछ सप्ताह में इतना कुछ घटित हुआ ...

शूद्र शिवाजी का राजतिलक करने से मना करने वाले क्यों हैं मोदी को सिर पर बैठाए

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सवर्णों की उंगलियां और मुंह मुलायम सिंह यादव, लालू यादव और मायावती सरीखे नेता/नेत्री जो कि एक तरह से दलित-पिछड़ों के लिए रहनुमा हैं के खिलाफ घृणा और झूठ फैलाते नहीं थकती। दूसरी तरफ अति-पिछड़े मोदी जिनकी जात ब्राह्मणीय व्यवस्था में आंशिक अछूत की श्रेणी में आती है को वे अपने सिर पर बैठाए हुए हैं।  सवर्णों में एक नीची जात के व्यक्ति को अपने सिर पर बैठाने की परंपरा रही ही नहीं है। नीची जात का व्यक्ति चाहे कितना भी ज्ञानी, बलवान या शौर्यवान क्यों न रहा हो द्विजों के मन में हमेशा उनके लिए कुंठा ही रही है। लिखित और मौखिक हर प्रकार से उनके खिलाफ उन्होंने दुष्प्रचार किया। प्राचीन काल से अब तक ऐसी ही परंपरा चली आ रही है। प्राचीन काल में एकराष्ट्र का सपना देखने वाले नंद वंश के सम्राट हो या फिर मध्ययुग में छत्रपति शिवाजी महाराज, द्विजों ने सबका अपमान किया। शूद्र होने के कारण उन्होंने शिवाजी महाराज का राजतिलक करने से मना कर दिया था। शिवाजी को कई वर्ष इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद उनका राजतिलक हो सका। संयंत्र के तहत उनके मकबरे को भी गुमनाम बना दिया गया, जिसे बाद में ज्योतिबा फूले ने खोजा।...

अभिनेता का दावा ईवीएम से छेड़छाड़ संभव, सुप्रीम कोर्ट गएं

द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. ईवीएम के विरुद्ध उठते आवाज में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस बार ईवीएम से छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया है एक अभिनेता ने। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के नामी विलेन मंसूर अली खान ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। खान ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष यह साबित करने का मौका दिया जाए कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव है। उन्होंने प्रक्रिया में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की मौजूदगी की भी बात कही है।

मोदी-राहुल ने किया गठबंधन, क्या विधानसभा में भी कायम रहेगी जोड़ी?

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द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. मोदी-राहुल ने गठबंधन कर लिया है। चौक गएं? चौंकिए मत। यह सच्चाई है। नॉर्थ एमसीडी(दिल्ली नगर निगम) के जोन चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन कर आम आदमी पार्टी(आप) को हरा दिया है। भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस की प्रत्याशी सीमा ताहिरा(अध्यक्ष) और सुलक्षणा(उपाध्यक्ष) को वोट कर आप को हरा दिया। इस जोन में आप के सबसे अधिक 8 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 6 पार्षद। भाजपा पार्षदों की वोट से कांग्रेस को 9-9 वोट मिले, जिससे अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कांग्रेस का कब्जा हो गया है।                      कांग्रेस को वोट करने के पीछे भाजपा की मंशा मुस्लिम बहुल विधान सभाओं में आप को कमजोर और कांग्रेस को मजबूत करना है। यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस-भाजपा ने गठबंधन किया है। इससे पहले मिजोरम की  चकमा स्वायत जिला परिषद् चुनाव में भी गठबंधन कर कांग्रेस-भाजपा ने मिजो नेशनल फ्रंट को रोका था।   दिल्ली में भाजपा-कांग्रेस...

सवर्ण अधिकारियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेवारी देने वाले मोदी कैसे करेंगे दलित-पिछड़ों का भला

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द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. मैं पिछड़ा हूं, मैं अति पिछड़ा हूं का प्रलाप कर पिछड़े-अति पिछड़े का वोट लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी चारों तरफ सवर्ण अधिकारियों को नियुक्त करते हैं। ये अधिकारी सवर्ण के साथ-साथ उस विचारधारा से संबंध रखते हैं जिसका मकसद दलित-पिछड़ों का शोषण कर उन्हें अपने देश में ही दोयम दर्जे का नागरिक बनाना है। दलित-पिछड़ों के आरक्षण में कमी, 13 प्वाइंट रोस्टर जैसै दलित-पिछड़ा(बहुसंख्यक) विरोधी सरकारी फरमान इसी विचारधारा का नतीजा है।   जानकारों का मानना है कि विवेकानंद फाउंडेशन अप्रत्यक्ष तौर पर मोदी सरकार को चला रही है। मोदी सरकार को अन्ना की सहायता से सरकार में लाने का श्रेय इसी संस्था को दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस संस्था का संबंध आरएसएस से है, जिसे संस्था के लोग नकारते हैं। लेकिन इनके प्रकाशनों में दक्षिण पंथी विचारधारा साफ-साफ देखी जा सकती है।   राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस संस्था के संस्थापक निदेशक थे। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र और अतिरिक्त प्रधान सचिव पीके मिश्र भी कार्यभार संभालने से पहले इस संस्था से जुड़े रहे हैं।...

हत्या को बलात्कार बता दुष्प्रचार के पीछे का मकसद हिंदू-मुस्लिम के बीच बैर को बढ़ाना है?

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द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. राजनैतिक दल सभी घटनाओं का राजनीतिकरण कर देते हैं। यह इतने गिर चुके हैं कि एक तीन साल की बच्ची ट्विंकल शर्मा की मौत को भी इन्होंने राजनैतिक और धार्मिक रंग दे दिया है। साथ ही उसके मौत पर इतना झूठ फैलाया कि ट्विंकल की आत्मा इन्हें धिक्कार रही होगी। लेकिन इन लोगों को परवाह नहीं। ट्विंकल की मौत को रेप का नाम दे हिन्दुओं को मुसलमान के खिलाफ भड़का कर राजनैतिक उल्लू सीधा करने वाले ये वही लोग हैं जिनके सांसद रेप के आरोप में अपनी पार्टी के सजायाफ्ता पूर्व विधायक को चुनाव में सहायता करने के लिए धन्यवाद कहने जाते हैं। ये वही लोग हैं जो आसिफा के बलात्कारियों को बचाने के लिए तीरंगा यात्रा निकालते हैं। अब सोचने वाली बात है कि वैसे लोग जो बलात्कारियों के साथ हमदर्दी रखते हैं क्या उन्हें सच में ट्विंकल की मौत का गम है?                              ऐसा तो बिल्कुल नहीं लगता। हिंदू बच्ची ट्विंकल की हत्या मुस्लिम युवकों के हाथ हुई। दो मुस्लिम ...

मुस्लिम देश से हिंदू मोदी ने क्यों की विदेश यात्रा का श्री गणेश

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द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. नेबर फर्स्ट (पड़ोसी पहले) पॉलिसी के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव से विदेश यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद वह श्रीलंका जाएंगे। साल 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी इसी पॉलिसी के तहत पहले विदेश दौरे पर भूटान गए थे।   यह मोदी का दूसरा मालदीव दौरा है। इससे पहले साल 2018 में राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में मोदी मालदीव गए थे, जिससे भारत-मालदीव के बिगड़ते रिश्ते पटरी पर लौटने शुरु हुएं।             मालदीव में पाकिस्तान से मुंह की खानी पड़ी मालदीव के पिछले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समय भारत-मालदीव के रिश्ते जहां खराब हुए, वहीं चीन-मालदीव के रिश्ते प्रगाढ़ हुए। यामीन के समय मालदीव को लेकर भारत को पाकिस्तान से भी मुंह की खानी पड़ी थी। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने जब आपातकाल लगाया था तो भारत मालदीव की मदद के लिए आगे आया था। भारत ने मालदीव को सैन्य मदद देने की बात भी कही थी, लेकिन मालदीव ने यह कहकर इनकार कर दिया था कि पाकिस्तान उसका सहयोग कर रहा है। जिसके जवाब म...

यादवों को बदनाम करने की कोशिश ताकि पिछड़ी जातियों में बैर बढ़े

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यादव पिछड़ी जातियों की रीढ़ की हड्डी हैं। इनकी कोशिशों से ही पूरा पिछड़ा समाज खड़ा हो पाने में समर्थ हो सका है। इसलिए सामंतियों की कोशिश होती है कि इस हड्डी को तोड़कर पूरे पिछड़ा समाज को फिर से अपंग बना दिया जाए। अपने प्रयोजन को सफल बनाने के लिए सामंती लोग, जिनकी मानसिकता ही है दलित-पिछड़ों का शोषण करना, वे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से यादवों पर हमला करते रहते हैं। अनुमान के मुताबिक हिंदुओं की कुल संख्या का 16-18% के करीब यादव हैं, जबकि उच्च जातियों की जनसंख्या 12-13% के करीब। अर्थात यादवों की जनसंख्या उच्च जातियों की जनसंख्या से करीब 4-5% तक अधिक है। उच्च जातियों की यादवों से घृणा का सबसे बड़ा कारण यही है। अपने संख्या बल और क्षत्रिय वंश के कारण यादव सामंतियों को उसी की भाषा में जवाब देते हैं। पिछड़ी जातियों को उठाने के लिए यादवों ने खूब संघर्ष किया है। पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष के तौर पर बीपी मंडल(यादव) ने शोषित सभी जातियों को ओबीसी लिस्ट में शामिल कर उनके विकास के लिए रास्ता बनाया। मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, शरद यादव जैसे लोगों ने मंडल कमीशन को लागू कराने के लिए सड़क से संसद तक ...

प्रताप सारंगी:- घिनौने करतूत को छुपाने के लिए सादगी का चोला

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जितना बताया जा रहा उतने सीधे नहीं सारंगी मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने प्रताप सारंगी की खूब चर्चा हो रही है। फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर सभी जगह उनकी सादगी की कहानी तैर रही है। सादगी के बहाने सारंगी अचानक से मीडिया के नए सेंसेशन बन चुके हैं। लेकिन इस सादगी के पीछे छुपा है एक काला चेहरा। सारंगी पर दंगा भड़काने, रंगदारी, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने जैसे सात बड़े मामले दर्ज हैं। कई मामलों में चार्जशीट भी हुई हैं। इन आरोपों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से अधिकतर मामले उस समय दर्ज हुए जब ओड़िशा में भाजपा-बीजद की गठबंधन सरकार थी। ऐसा बताया जा रहा है कि सारंगी क्रिश्चियन मिशनरियों के  खिलाफ हमेशा उग्र रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 1999 में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ग्राहम स्टैंस और उनके दो बच्चों की हत्या से जुड़ा मामला है। ग्राहम स्टैंस अपने परिवार के साथ ओड़िशा में कुष्ठ रोगियों की सेवा करते थे। दक्षिणपंथी ताकतों ने उनपर धर्मांतरण के आरोप लगाएं। एक रात जब वे अपने दो बेटों(11 साल और 7साल) के साथ सो रहे थे तब बजरंग दल ने उनकी गाड़ी में आग लगा दी। उस ...

नीतीश का राजनीतिक रेप (political rape of Nitish)

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नीतीश का राजनीतिक रेप Political rape of nitish बिहार के मुख्यमंत्री और जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का राजनीतिक बलात्कार हो चुका है। नीतीश की स्थिति बलात्कार पीड़ित उन महिलाओं की तरह हो गई है जो बलात्कार के कारण घोर पीड़ा और अवसाद में होती हैं लेकिन जगहंसाई के कारण किसी से अपना दुख बांटती नहीं। नीतीश अंदर से काफी दुखी हैं। ऐसा उनके चेहरे से पता भी चलता है, लेकिन खुलकर जाहिर नहीं कर रहें। भाजपा और जद(यू) 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की वहीं नीतीश 16 सीट जीतने में सफल रहें। ऐसे में नीतीश को आशा थी कि मंत्रीमंडल में उन्हें कम से कम 3 सीटें दी जाएंगी लेकिन भाजपा एक से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं थी। इस मुद्दे को लेकर खूब उठा-पटक हुआ और "डैमेज कंट्रोल" के लिए  नतीजा निकला कि जद(यू) मंत्रीमंडल से बाहर रहेगी। मंत्रीमंडल से बाहर रहने के फैसले के बाद सिर बचाने के लिए नीतीश ने कहा कि जनता ने किसी चेहरे को देखकर वोट नहीं किया, जो कि मोदी पर सीधा हमला था। नीतीश का जलवा ऐसा था कि वह अटल-आडवाणी की आंखों में आंखें डाल बात करते थे। भाजपा ...