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पेट भरने के लिए मुर्दा बन रहे गरीब, आ गया बहार

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 बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक है। लोग कहीं कोरोना से , कहीं बाढ़ से तो कहीं बेरोजगारी से मर रहे हैं। चारों तरफ कोलाहल है जो सरकार की असफलता, अअकर्मण्यता और नपुंसकता का परिचायक है। इसके बेवजूद बेशर्मी की हद पार करते हुए सरकार खुद का गुणगान कर रही है। लेकिन, पिछले चुनाव का नीतीश सरकार का स्लोगन अब भी खूब जोर से प्रचार किया जा रहा है- बिहार में बहार है, नीतीशे सरकार है।  आरा का एक वाकया सामने आने के बाद लोगों की जुबां पर यही सवाल है ; क्या यही बिहार में बहार है? दरअसल, आरा में एक रिक्शा चालक कई दिनों से भूखा था। लॉकडाउन के कारण सवारी नहीं मिल रही थी तो पेट भरने के लिए वह कफन ओढ़कर सड़क किनारे सो गया। इसके बाद राहगीरों ने कुछ पैसे डालना शुरू कर दिए। कई ने फूल और अगरबत्ती तक लाकर वहां रख दिए। कई दिनों से रिक्शा चालक यह तरकीब अपनाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। बता दें यह रिक्शा चालक पटना के बिहटा के रहने वाले हैं। इनका नाम रामदेव है और आरा में रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं। मामला उजागर होने के बाद रामदेव ने बताया कि मार्च में केंद्र सरकार द्वारा लागू लॉकडाउन में उन्हें परेश...

समस्तीपुर के ताजपुर थाना अंतर्गत स्थित खुदनेश्वर स्थान है हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

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द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. खुदनी और ईश्वर के मेल से बना है खुदनेश्वर। लेकिन वृहद स्तर पर इसे खुदा + ईश्वर कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। खुदा और ईश्वर को एक जगह मजबूती से पकड़े रखने वाला यह मंदिर बिहार के समस्तिपुर जिला के ताजापुर थानांतर्गत आने वाले मोरवा गांव में स्थित है एवं सदियों से हिंदू-मुस्लिम को एक सूत्र में पीड़ोने का काम कर रहा है।                                                सबसे पहले सन 1858 में यहां मंदिर बनाया गया। बढ़ते समय के साथ कई बार पुनर्निर्माण हुआ। मंदिर के गर्भ गृह में एक ओर शिवलिंग तो दूसरी ओर मजार है। शिवलिंग की कहानी रोचक है। काफी वर्षों पहले यहां एक मुस्लिम महिला खुदनी बीवी गाय चराने आया करती थी। एक दिन उसे इस जगह पर कुछ चमत्कार जैसा लगा। उसने गांव वालों को यह बात बताई, जिसके बाद उन्होंने कुदाल से इस जगह की खुदाई कर शिवलिंग क...