सवर्ण अधिकारियों को बड़ी-बड़ी जिम्मेवारी देने वाले मोदी कैसे करेंगे दलित-पिछड़ों का भला
द एक्सपोज़ एक्सप्रेस. मैं पिछड़ा हूं, मैं अति पिछड़ा हूं का प्रलाप कर पिछड़े-अति पिछड़े का वोट लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी चारों तरफ सवर्ण अधिकारियों को नियुक्त करते हैं। ये अधिकारी सवर्ण के साथ-साथ उस विचारधारा से संबंध रखते हैं जिसका मकसद दलित-पिछड़ों का शोषण कर उन्हें अपने देश में ही दोयम दर्जे का नागरिक बनाना है। दलित-पिछड़ों के आरक्षण में कमी, 13 प्वाइंट रोस्टर जैसै दलित-पिछड़ा(बहुसंख्यक) विरोधी सरकारी फरमान इसी विचारधारा का नतीजा है। जानकारों का मानना है कि विवेकानंद फाउंडेशन अप्रत्यक्ष तौर पर मोदी सरकार को चला रही है। मोदी सरकार को अन्ना की सहायता से सरकार में लाने का श्रेय इसी संस्था को दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस संस्था का संबंध आरएसएस से है, जिसे संस्था के लोग नकारते हैं। लेकिन इनके प्रकाशनों में दक्षिण पंथी विचारधारा साफ-साफ देखी जा सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस संस्था के संस्थापक निदेशक थे। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र और अतिरिक्त प्रधान सचिव पीके मिश्र भी कार्यभार संभालने से पहले इस संस्था से जुड़े रहे हैं।...