क्या कहते हैं कृष्ण उपवास के विषय में? Is lord Krishna and Buddha same?
It is a bilingual article कई लोगों का प्रश्न रहता है की कृष्णा ने उपवास के बारे में क्या कहा है। इसका उत्तर श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय -६ के श्लोक १६ में है। अर्जुन के प्रश्न के उत्तर में कृष्ण कहते हैं - नात्यश्नतस्तु योगोस्ति न चैकान्तमनश्नतः न चाती स्वपनशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन इस श्लोक का अर्थ है- हे अर्जुन यह योग न तो बहुत खानेवाले का , न बिलकुल न खाने वाले का, न बहुत सोने वालों का और न ही सदा जागने वाले का पूरा होता है। अर्थात कृष्णा साफ़-साफ़ कह रहे हैं की ईश्वर को पाने के लिए उपवास जैसे पाखंड की जरुरत नहीं है। ईश्वर न तो बहुत अधिक खाने वालों को मिलते हैं और न ही एकदम नहीं खाने वालों को। ईश्वर केवल जरुरत के अनुसार खाने वालों को मिलते हैं। क्या बुद्ध ही कृष्ण हैं? बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के लिए लम्बे समय तक भूखा रहकर तपस्या की थी, लेकिन उसका परिणाम शुन्य रहा। उल्टा वह हड्डिओं का ढांचा मात्रा रह गए थे। सुजाता नाम की ग्वालन ने जब उन्हें पहली बार देखा तो उसे ऐसा प्रतीत हुआ की वह पेड़ के ही भाग।...