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क्या कहते हैं कृष्ण उपवास के विषय में? Is lord Krishna and Buddha same?

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It is a bilingual article कई लोगों का प्रश्न रहता है की कृष्णा ने उपवास के बारे में क्या कहा है। इसका उत्तर श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय -६ के श्लोक १६ में है। अर्जुन के प्रश्न के उत्तर में कृष्ण  कहते हैं -  नात्यश्नतस्तु योगोस्ति न चैकान्तमनश्नतः  न चाती स्वपनशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन  इस श्लोक का अर्थ है- हे अर्जुन यह योग न तो बहुत खानेवाले का , न बिलकुल न खाने वाले का, न बहुत सोने वालों का और न ही सदा जागने वाले का पूरा होता है। अर्थात कृष्णा साफ़-साफ़ कह रहे हैं की ईश्वर को पाने के  लिए उपवास जैसे पाखंड की जरुरत नहीं है। ईश्वर न तो बहुत अधिक खाने वालों को मिलते हैं और न ही एकदम नहीं खाने वालों को। ईश्वर केवल जरुरत के अनुसार खाने वालों को मिलते हैं।  क्या बुद्ध ही कृष्ण हैं? बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के लिए लम्बे समय तक भूखा रहकर तपस्या की थी, लेकिन उसका परिणाम शुन्य रहा।  उल्टा वह हड्डिओं का ढांचा मात्रा रह गए थे।  सुजाता नाम की ग्वालन ने जब उन्हें पहली बार देखा तो उसे ऐसा प्रतीत हुआ की वह पेड़ के ही भाग।...

अहीर रेजिमेंट हक है हमारा ट्रेंड कराने के पीछे क्या है बीजेपी का मकसद

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बीते 6 जून को अहीर रेजिमेंट हक़ है हमारा   ट्विटर पर ट्रेंड कराया गया। यह चार लाख से अधिक बार रीट्वीट किया गया। समझने वाली बात है की अकेले यादवों के पास इतने संसाधन नहीं हैं की वो अपने समाज से जुड़े मुद्दे को चार लाख से अधिक बार रीट्वीट करा लें। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी अखिलेश यादव ने अहीर रेजिमेंट की मांग उठाई थी। इसे ट्वीटर पर ट्रेंड करने की कोशिश भी हुई थी, लेकिन इतने रीट्वीट नहीं हो पाए थे। रीट्विटों की संख्या इससे काफी कम थी। अब प्रश्न उठता है कि इस बार इतना रीट्विट कैसे संभव हो पाया? किन लोगों की मेहनत इसके पीछे थी? किन लोगों ने इसे मुमकिन बनाया? भाजपा आईटी सेल ने मुमकिन बनाया  जवाब है भाजपा आईटी सेल के सदस्य। जवाब जानकर आप चौंके होंगे लेकिन यही सच्चाई है। ध्यान देने वाली बात है कि अहीर रेजिमेंट हक है हमारा    को 7 जून को संपन्न हुए गृहमंत्री अमित शाह की वर्चुअल रैली से ठीक एक दिन पहले ट्रेंड कराई गयी। रैली कुछ महीने में होने वाली बिहार चुनाव के मद्देनजर आयोजित की गई थी। बिहार में मुख्य विपक्ष राजद है, जिसके सुप्रीमो लालू यादव हैं। भा...

नितीश को किस से है फेसबुक हैक किये जाने का डर

जेडीयू ने बीते दिनों अपने कार्यकर्ताओं  से फेसबुक के हैकिंग को लेकर सावधान रहने की बात कही थी। गुप्त सूत्रों ने बताया की इसके बाद ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने अपने अकाउंट को डीएक्टिवेट कर लिया।  कई दो दिनों तक फेसबुक से नदारद रहे।  जदयू की तरफ से यह चेतवानी अमित शाह की वर्चुअल रैली से पहले दी गयी थी। अमित शाह की रैली के पीछे मकसद बिहार में अपनी शक्ति दिखानी थी।  जदयू को शंका थी की बीजेपी की आईटी सेल कहीं उसके कार्यकर्ताओं की फेसबुक प्रोफाइल से छेडछाड़ न कर दे इसके लिए कार्यकर्ताओं को हिदायत दी गयी।  गौरतलब है की बिहार चुनाव  देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह   ने 7 जून को डिजिटल रैली की थी जिसमे ७२००० एंड्राइड टीवी का प्रयोग हुआ था.

युद्ध के लिए तीन दिन में अपनी सेना तैयार कर लेने की बात करने वाले भागवत मौका आने पर चुप क्यों हो जाते?

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अजय शुक्ला समेत कई वरिष्ठ रक्षा पत्रकार के अनुसार चीनी सेना गलवान घाटी और पेंगोंग त्सो के साथ कई भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ कर चुकी है और पीछे हटने को तैयार नहीं है. कई जगह पर उसने बंकर भी बना लिए हैं। वह पुरे गलवान वैली को अपना बता रही है और पेंगोंग त्सो के बड़े हिस्से पर अपना खूंटा गाड़ दी है। भारतीय और चीनी अधिकारिओं के बीच फ्लैग मीटिंग हुई जो बेनतीजा निकली। चीन पीछे हटने के मूड में बिलकुल नहीं है। ऐसा वरिष्ठ स्वतंत्र रक्षा पत्रकार बताते हैं।  दूसरी तरफ केंद्र सरकार फ्लैग मीटिंग को सफल बता रही है और अपने मीडिया से झूठ फैला रही है कि चीन पीछे हटने को तैयार हो गया है. भारत-चीन पर सीमा पर स्तिथि कितनी भयावह है इसके अंदाजा बीते सप्ताह वायरल हुई कई वीडियो से पता चलता है। जिन क्षेत्रों में भारतीय पेट्रोलिंग की संख्या कम थी और चीनी सैनिक उस क्षेत्र में उनसे कई गुना ज्यादा थे उन क्षेत्रों में उन्हें बाँधा तक गया। 70-80 सैनिकों को काफी चोटें आयी जिसके बाद उन्हें स्थिति की गौभीरता के अनुसार चंडीगढ़ तक इलाज के लिए भेजा गया। बीते कुछ सप्ताह में इतना कुछ घटित हुआ ...

जब राजपूतों ने कुर्मिओं को राजा नहीं बनने दिया

असफ-उद्-दौला जो कि अवध के चौथे नवाब थे ने अठारहवीं शताब्दी के अंत में कुछ अमीर और प्रभावशाली अयोध्या कुर्मी जमींदारों को राजा का टाइटल देना चाहा।  राजा का टाइटल क्षत्रिय होने का प्रमाण है। लेकिन नवाब के दरबार में शामिल राजपूत सरदारों ने इसमें टांग लगा दी।  इस वजह से नवाब अपने सामाजिक न्याय के मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके। सबसे बड़ी बात यह है की राजपूतों का यह समूह कुछ दिन पहले ही कोर्ट में बैठने के योग्य बने थे। इससे पहले वो छोटे दर्जे के सैनिक हुआ करते थे, जैसा की अंग्रेज इतिहासकार फ्रांसिस बुकानन ने लिखा है। इतिहासकार विलियम फिंच ने लिखा है की ब्राह्मनों के बाद राजपूत ही राज्य के संसाधनों के सबसे बारे लाभार्थी हुआ करते थे. इतिहासकार रिचर्ड बेरनेटे लिखते हैं की असफ इस लाभ का अंग अन्य दूसरी जाति  को भी बनाना चाहते थे जो की राजपूतों को नामंजूर था।

History of Bari Patandevi

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Patandevi is the city magistrate and preserver power of Patna. Bai Patan Devi has an important place among the 51 Shakti Peeths . According to the Puranas, wherever the body parts of Shiva's first wife Sati fell, have been called Shakti Peetha. It is believed that the right thigh of Sati fell here. There are two Patanadevis in Patna - Badi Patadevi and Chhotipatan Devi. Badi Patandevi is located south of Gulzarbagh in Maharajganj between Ashok Rajpath and Shershah road(english road). There is a big pit behind the temple which is called Patnadevi Khandha. It is said that the black idols of the three goddesses, Durga, Lakshmi and Saraswati which are placed in the temple were found in this pit.  The idol of Bhairava is also installed in the temple which is worshiped as Vyomkesh. In the temple. It is customary to offer raw food to the goddess and day time and cooked at night. Badi Patan Devi is known for Kaulik Mantra. The building of Chota Patan Devi is older than that of ...

Casteist Indian media looses reliability, backward and scheduled classes journalists blooms

Though the present scenario has not been good for the down trodden castes of India but it has certainly proved to be fruitful in terms of BAHUJAN JOURNALISM i.e, journalism for the cause of backward and scheduled castes/tribes. Just like all other fields Indian journalism has been a upper castes paradise. Any upper caste person whether he poses quality or not can be a journalist through his links. This is the main reason behind the low standard and psycophancy in Indian Journalism in comparison to the west. Around 70-75% of Indian journalists are brahmans. when we add other upper caste journalist in this list then the share goes as high as 93-95%. Contrast is that UPPER Caste people do not account for more than 12-14% of Indian Population. Share of downtrodden people(Backward Classes, Scheduled Castes and Scheduled Tribes) is miniscule. The journalists who with their talent secured a position in journalism have been facing biases. They have been given lower salary than incomp...